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नहीं,
यह स्वास्थ्य के लिए अहितकर नहीं है । वस्तुत: मानव शरीर में
प्राकृतिक रुप से ही कुछ ग्राम भारी पानी मौजूद रहता है । नवजात
शिशुओं, नई माताओं और वयस्कों पर क्लीनिकल अध्ययनों में भारी पानी
का उपयोग किया गया है किंतु इसमें कोई भी प्रतिकूल प्रभाव नहीं पाया
गया है । भारी पानी का विषाक्त प्रभाव तभी पड़ सकता है जब मानव शरीर
में भारी पानी की मात्रा शरीर के कुल तरल पदार्थों के 20%
से अधिक हो जाए, जो कि सामान्यत: संभव नहीं है । कोई भी बुरा प्रभाव
तभी पड़ सकता है जब बहुत बड़ी मात्रा में भारी पानी पी लिया जाए ।
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