देश
में भारी
पानी
संयंत्रों
के अभिकल्पन,
विकास,
निर्माण,
अधिचालन,
प्रचालन एवं
अनुरक्षण
के अधिदेश
को पूरा
करने के
फलस्वरूप
भारतीय
नाभिकीय
विद्युत
कार्यक्रम
के प्रथम
एवं दूसरे
चरण हेतु
कुछ महत्वपूर्ण
निवेशों के
संदर्भ में
दी गयी
चुनौती को
बोर्ड
द्वारा स्वीकार
किया गया
तथा
विविधीकरण
के अंतर्गत
विभिन्न
कार्यों को
हाथ में
लिया गया
है । इसके
फलस्वरूप
भारतीय
नाभिकीय
विद्युत
कार्यक्रम
के अंतर्गत
फ्रंट एवं
बेक एंड
में भापाबो
सबसे महत्वपूर्ण
भूमिका
निभायेगा ।
विविधीकरण
प्रक्रिया
के कुछ
क्षेत्र
निम्नवत
है :-
-
द्वितीयक
स्त्रोतों
से
यूरेनियम
के निष्कर्षण
में
विलायकों
के रूप में
उपयोग किए
जाने के
लिए ट्राई
ब्यूटिल
फास्फेट
एवं D2EPHA
विलायकों
का उत्पादन
।
-
बोरान-10
का
उत्पादन
करने के
लिए
संयंत्र
की
अभियांत्रिकी,
परियोजना
प्रबंधन,
निर्माण
एवं
प्रचालन
तथा PTFBR
प्रकार के
रिएक्टरो
में इसको
प्रदान
करना।
-
नाभिकीय
औषधि एवं
जैव रसायन
अनुसंधान
में उपयोग
किए जाने
के लिए O18
तथा C13
जैसे
समस्थानिकों
के उत्पादन
के लिए
प्रक्रिया
तथा
प्रौद्योगिकी
का विकास।
-
पीटीएफबीआर
प्रकार के
रिएक्टरो
के लिए नाभिकीय
ग्रेड के
सोडियम का उत्पादन
एवं
आपूर्ति
करने के
लिए
संयंत्र
की
अभियांत्रिकी,
निर्माण
एवं
प्रचालन ।
-
पीएफबीआर
प्रकार के
रिएक्टरो
के लिए
समृद्ध
बोरोन
कार्बाइड
नियंत्रण
छड़ों की
आवश्यकता
को पूरा
करने के
लिए बोरिक
अम्ल
समृद्धिकरण
सुविधा की
स्थापना
।
-
भापासं,
मणुगुरू
में
एलेमेन्टल
बोरोन का
उत्पादन
करने के
लिए एक
सुविधा की
स्थापना
।
-
नाभिकीय
रिएक्टरों
से
यूरेनाइल
नाइट्रेट
परिवर्तित
करने हेतु
केन्द्रीयकृत
यूरेनियम
ऑक्साइड
रूपांतरण
सुविधा
जैसी
सुविधा की
स्थापना
।
-
TAPO,
TOPO इत्यादि
जैसे अन्य
विलायकों
के उत्पादन
हेतु
प्रक्रिया
विकास,
अभियांत्रिकी
संबंधी
कार्य जारी
है ।
-
नाभिकीय
रिएक्टरों
मे उपयोग
किए गए भारी पानी
से संदूषण को अलग करने
हेतु भारी
पानी क्लीनअप
सुविधा का
निर्माण ।
-
हीलियम
के उत्पादन
हेतु एक
प्रौद्योगिकी
विकास
इकाई की स्थापना
।
-
समस्थानिक
पृथक्करण,
विलायक
विनिर्माण,
नये उत्प्रेरकों
इत्यादि
हेतु नई
प्रक्रियाओं
को विकसित
करने हेतु
अनुसंधान
एवं विकास
केन्द्र
की स्थापना
।
हाईड्रोजन-जल
विनिमय
प्रक्रिया
का उपयोग
करने के
लिए भापाबो
उत्प्रेरक
का विकास
करने में
अनुसंधान
एवं विकास
गतिविधि
को भी कर रहा
है ।
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