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भारी
पानी बोर्ड - इसकी क्षमता एवं विशेषज्ञता:
भारी पानी बोर्ड
(भापाबो), परमाणु ऊर्जा विभाग के अधीन उद्योग एवं खनिज क्षेत्र की एक
संघटक इकाई है।
भापाबो बड़े पैमाने पर
भारी पानी संयंत्रों के अभिकल्पन, अभियांत्रिकी, निर्माण, अधिचालन
एवं प्रचालन के लिए जिम्मेदार है । इसमें देश के विभिन्न भागों में
स्थित सात संयंत्र हैं । ये संयंत्र दो भिन्न प्रक्रिया
प्रौद्योगिकियों पर आधारित हैं । बोर्ड में 3000 से अधिक योग्य
तकनीकी कार्मिक है जिन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में अभिकल्पन से
प्रचालन तक की विशेषज्ञता हासिल की है ।
प्रौद्योगिकीय
रूप से भारी पानी के निर्माण की प्रक्रिया बहुत सी रासायनिक
प्रक्रियाओं के समान ही है । इनमें जो मुख्य अंतर है वह इस प्रणाली
की व्यापकता के कारण है जिसमें नाभिकीय श्रेणी के भारी पानी के
उत्पादन के लिए, उसमें हजार गुणा समृद्धिकरण की जरूरत पड़ती है ।
प्रक्रिया मूल्यांकन एवं पुनरीक्षण :
भारतीय
परिदृश्य में विभिन्न प्रक्रिया प्रौद्योगिकियों के मूल्यांकन एवं
उनके किसी विशिष्ट अनुप्रयाग हेतु उपयुक्त सर्वोत्तम प्रक्रिया के
चयन में बोर्ड अपनी सेवाएं उपलब्ध करा सकता है । इस गतिविधि में
प्रक्रिया विश्लेषण, प्रक्रिया पैकेज एवं विभिन्न उपयोगिताओं के
मूल्यांकन एवं आफ साइट प्रणालियों की समीक्षा आदि शामिल होती है,
जिसे आवश्यकतानुसार माडलों का उपयोग कर प्रक्रियाओं के मूल्यांकन
द्वारा पूरा किया जाता है ।
अक्सर,
प्रक्रिया मूल्यांकन में विश्लेषणात्मक सहायता की आवश्यकता होती
है और हमारे सभी सयंत्रों में सुसज्जित आधुनिक प्रयोगशाला सुविधाएं
विद्यमान हैं, जहां कतिपय प्रयोगशाला स्तर के प्रयोग किये जा सकते
हैं । प्रक्रिया लाइसेंस धारकों द्वारा किये गये कतिपय दावों के
मूल्यांकन को माडलिंग, सिमुलेशन, जांच पड़ताल एवं प्रायोगिक
विश्लेषण द्वारा प्रमाणित किया जा सकता है ।
एकीकृत ऊर्जा प्रबंधन, प्रकिया अनुरूपांतरण एवं प्रक्रिया
री-इंजीनियरिंग :
प्रणालियों पर
पड़ने वाले संकुचन प्रभावों (पिंचिंग इफेक्ट) तथा उनके गत्यावरोध
वाले क्षेत्रों (बॉटल नेकिंग) का पता लगाने के लिए विवेचनात्मक
विश्लेषण किया जाता है तथा संकुचन प्रौद्योगिकी (पिंचटेक्नोलॉजी),
कक्ष प्रणालियों एवं मॉडलों जैसे अनेक आधुनिक औजारों का प्रयोग कर
इनमें सुधार किये जाते हैं । सीमांत प्रणालयों का या उपस्करों का
पता लगाकर आधुनिकता स्वरूप के कतिपय क्रांतिक उपस्करों का
अनुरूपांतरण किया जाता है । इस प्रकार का परिवर्तन करते समय यह
सुनिश्चित किया जाता है कि किसी भी प्रकार से संयंत्र का प्रचालन
प्रभावित नहीं हो तथा आपदाओं एवं प्रचालनीयता का अध्ययन भी कर लिया
जाए ।
अधिचालन सहायता :
अपने संयंत्रों
के अधिचालन के दौरान प्राप्त अनुभवों से हमें किसी भी
रासायनिक/पेट्रो रासायनिक संयंत्रं के अधिचालन के कार्य क्षेत्र में
अभूतपूर्व आत्मविश्वास प्राप्त हुआ है । अधिचालन योजना के अंतर्गत
संयंत्रों की माड्यूलिंग, प्रत्येक उप माड्यूल में क्रांतिक
गतिविधियों की पहचान करना, अधिचालन क्रियाविधियों को लिखित रूप देना,
जोड़ना शामिल होता है ।
भारी पानी बोर्ड द्वारा अपनायी गयी प्रचालन पद्धतियां एवं
क्रियाविधियां, विभिन्न संयंत्रों से विकसित हुई हैं तथा उनका किसी
भी बड़े पैमाने के प्रक्रिया संयंत्र के अधिचालन में यथासंभव कम समय
में सुरक्षित एवं कुशलतापूर्वक उपयोग किया जा सकता है ।
संरक्षा संबंधी मूल्यांकन :
भारी पानी बोर्ड
द्वारा वर्षों के अनुभव के आधार पर संयंत्र के अभिकल्पन स्तर पर ही
अभियांत्रिकी संरक्षा विशेषताओं का प्रावधान कर तथा उसके निर्माण,
अधिचालन एवं प्रचालनीय स्तर पर संरक्षा एवं गुणवत्ता आश्वासन के
संबंध में पूर्ण क्षमता विकसित की गयी है । बोर्ड द्वारा अपने ही
प्रचालित संयंत्रों की संरक्षा समीक्षा एवं पुनर्मूल्यांकन का कार्य
आरंभ किया गया है तथा बोर्ड
HAZOP/HAZAN
अध्ययन के क्षेत्र में तथा संयंत्र स्थल पर
(ऑनसाइट) तथा संयंत्र स्थल से दूर (आफ साइट) आपातकालीन कार्रवाई
योजना उपलब्ध कराने में सक्षम है जिनमें गैस विक्षेपण, माडलिंग एवं
जोखिम मूल्यांकन अध्ययन के माध्यम से व्यापक पैमाने पर विषैली
गैसों/वाष्पों के रिसाव को कम करने में मदद मिल सकती है ।
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